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हिटलर तुम अब न लौट आना

                
                                                         
                            हिटलर तुम अब न लौट आना
                                                                 
                            

हिटलर जैसे कुछ लोग हैं सनकी,नफ़रत भरी सोच उनकी
हिंसा से डरता हैं जमाना,हिटलर तुम अब न लौट आना

तुम्हारी सोच के कई हैं नेता,करते जब नफ़रत की बातें
युद्ध की आहट होने लगती हैं,और होती हैं हिंसा की बातें

हिंसावादी तुम नायक थे,विश्व के तुम खलनायक थे
सोच में तुम्हारे थी नफरत,लहू बहाना थी तुम्हारी फ़ितरत

लाखों मासूमों की चीखें,गैस चैंबर में घुट गईं थी
इंसानियत की हर एक आस तुम्हारी ज़िद से टूट गईं थी

बच्चों की मासूम हँसी पर,तूने बारूद बरसाया था
इंसानों को ज़िंदा भूनकर,शमशान बनाया था

नस-नस में था ज़हर तुम्हारे,नस-नस में जल्लाद बसा था
तेरी क्रूरता देख कर ,शैतान भी खून के आँसू हंसा था

गांधीजी ने पत्र भेजा था,काश पढ़कर तुम समझे होते
तुम्हारी जान भी बच गई होती,करोड़ो लोग भी जिंदा रहते

दुनियाँ को ईसा और बुद्ध की,शांति की छाया चाहिए
नफ़रत भरे दौर में अब तो,अहिंसा का साया चाहिए

लौट आये अब फिर गाँधी,जो नफ़रत की आंधी को मोड़े
टूटे हुए इंसान के दिल को प्रेम के धागों से फिर जोड़े

विश्वयुद्ध की आहट भर से,अब डरने लगा हैं यह ज़माना
तेरी याद ही भयावह साया,हिटलर तुम अब न लौट आना

युद्ध से हमें लगता हैं डर,याद आते हो जब तुम हिटलर
तुम्हारे बिना सुखी हैं जमाना,हिटलर तुम अब न लौट आना

 
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4 घंटे पहले

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