लवों पर मेरे ख़ुदा का नाम,दिल में बसे हैं मेरे राम
हर हिंदू में बसे हो 'गाँधी,हर मुस्लिम में हो कलाम
न हिंदू हूँ न मुसलमान हूँ,मैं तो बस इंसान हूँ
एक हाथ में गीता मेरे,दूजे हाथ क़ुरान हैं
न मैं नेता हूँ,न अभिनेता,क्यों मैं झूठे स्वांग धरूँ
मंज़िर-मस्जिद के झगड़ों में,क्यों ख़ुद को कुर्बान करूँ
हर हिंदू में बसे हो 'गाँधी
हर मुस्लिम में हो कलाम
भारत माँ की जय बोलेंगे,इक़बाल' के तराने गाएंगे
मज़हब की दीवारें ढाकर,अमन का सुर लगाएंगे
होली, बैसाखी, ईद, दिवाली,इस माटी के गहने हैं
हर रंग से सज़ा हैं गुलशन,वाह रे वाह क्या कहने हैं
हर हिंदू में बसे हो 'गाँधी
हर मुस्लिम में हो कलाम
राम, कृष्ण, नानक और बुद्ध,अवतरित हुए इस माटी में।
तेग-और-तलवारों के जौहर देखे,हमने हल्दीघाटी में
लाखों की कुर्बानियों से,यह चमन हमारा महका हैं
संविधान आन हमारी हैं,लोकतंत्र हमारा रुतबा हैं
हर हिंदू में बसे हो 'गाँधी
हर मुस्लिम में हो कलाम
लवों पर मेरे ख़ुदा का नाम,दिल में बसे हैं मेरे राम
हर हिंदू में बसे हो 'गाँधी,हर मुस्लिम में हो कलाम
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