जो भी साया था बुरे वक्त का साया ना रहा
जब मेरे लब पे खुदा तेरी मुनाजात हुई
खुश बहुत होता है अल्लाह उसी मोमिन से
जिसके हाथों से रहे हक़ में जो खैरात हुई
-फ़ौज़िया नसीम शाद
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