कल्ब का दर्द पूछ मत हमसे
दर्द है बेशुमार आंखों में
- फ़ौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X