आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आप हमसे

                
                                                         
                            आप हम से ख़फ़ा नहीं होना।
                                                                 
                            
चाहे कुछ हो जुदा नहीं होना।

बद्दुआ देके तुम किसी को भी,
अपने ‘रब’ का बुरा नहीं होना।

तुम भी इंसा हो ये ख़्याल रहे,
पाके दौलत ख़ुदा नहीं होना।

इश्क़ शायद इसी को कहते हैं,
ख़ुद को ख़ुद का पता नहीं होना।
- फौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
42 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर