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यार, तुम बहुत लालची हो

                
                                                         
                            किसी ने कहा-
                                                                 
                            
यार, तुम बहुत लालची हो।

मैंने भी बेधड़क कह दिया-
लालच न होता
तो निश्चय ही मैं यहाँ न होता,
और शायद तुम भी यहाँ न होते।

इसी लालच से तो
हम-तुम यहाँ हैं, साथ हैं।
हमारे-तुम्हारे
मिलने-जुलने का कारण भी
यही लालच है।

लालच बला नहीं,
यदि दिशा सही हो-
तो लालच
जीवन को आगे बढ़ाने वाला
एक पुरस्कार है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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