किसी ने कहा-
यार, तुम बहुत लालची हो।
मैंने भी बेधड़क कह दिया-
लालच न होता
तो निश्चय ही मैं यहाँ न होता,
और शायद तुम भी यहाँ न होते।
इसी लालच से तो
हम-तुम यहाँ हैं, साथ हैं।
हमारे-तुम्हारे
मिलने-जुलने का कारण भी
यही लालच है।
लालच बला नहीं,
यदि दिशा सही हो-
तो लालच
जीवन को आगे बढ़ाने वाला
एक पुरस्कार है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X