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दर्द, घाव

                
                                                         
                            आदमी हो या जानवर-
                                                                 
                            
दर्द सबको होता है,
घाव सबको होते हैं।

जानवर अपने दर्द को स्वयं सहता है,
अपना घाव स्वयं ही चाटता है
और स्वयं ही भरता है।

इसके विपरीत,
आदमी की फितरत देखो-
जो पहले स्वयं घाव पैदा करता है,
फिर अपना दर्द दूसरों से बांटता है।
अपना घाव भी दूसरों से ठीक कराता है।

आदमी ही है,
जो अपने दर्द को तो बांटता है,
पर खुशी को समेटता है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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