इस जगत् में मां।।
के जैसा कोई नहीं।।
मां है मां बस मां।।
ही मां और कहाँ नहीं।।
हर बालपन के
पीछे सिर्फ ममता।।
उड़ेलती है ऐसी है मां।।
कुछ कहा नहीं।।
जहां तलाश लो
दिल से वहीं।।
पे है मां।।
और क्या क्या नहीं।।
मोती सी टपकने वाली
असुवन है मां।।
पर्वत सी अटल
होती है मां।।
और तो नहीं।।
काल से टकरा।।
जाती है मां।।
महासागर सी गहरी
होती है मां।।
ऐसा ही तो नहीं।।
धरा धरणी गगन
से खूबसूरत मां।।
इनके लिए कोई
शब्द नहीं जुड़ता।।
बड़ी निराली।।
होती है मां।।
जाड़े गर्मी की।।
आँचल होती है मां।।
जगह-जगह पे है मां।।
कैसे कहें क्या
होती है मां।।
मां का एक
अलग ही रूप है
जिसमें ममता,दया
और छांव रूपी
लंबी आँचल हो
वही है मां।।
भावनाओं में भावुक
होती है मां।।
इस जगत् में मां।।
के जैसा कोई नहीं।।
मां है मां बस मां।।
ही मां और कहाँ नहीं।।
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