कोयल कु कु कर बोली।।
सबके मन में मिठास घोली।।
चेहरे पर मुस्कान
की बयार लाई ।।
ऐसे मानो मन में
नई उमंगें डाली ।।
इस जीवन की बगिया
में मन का
कोई मोल नहीं।।
फिर भी तू कितनी प्यारी।।
कोयल कु कु कर बोली।।
सबके मन में मिठास घोली।।
इस दुनियां की उलझन
में रह लो।।
पर जबां पे कोई
दर्द न खोलो।।
धन बिना बितायी न जाये
इस जीवन की खोली।।
कोयल कु कु कर बोली।।
सबके मन में
मिठास घोली।।
उस अम्बर से इस जमीं तक।
सब अपने जैसा दिखता
दिल की जहां तक।।
उस अम्बर से इस जमीं तक।
सब अपने जैसा दिखता
दिल की जहां तक।। कोयल कु कु कर बोली।।
सबके मन में मिठास घोली।।
वन उपवन झील झरने नदियां
ये प्रकृति है कितनी अनूठी।।
प्रकृति की मनोरम छटा।।
मन मोहे काली काली घटा।।
कोयल कु कु कर बोली।। सबके मन में मिठास घोली।।
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