जीवन तो सिर्फ
एक तरास है ।।
प्रियतम तो पास है।।
पर दूर नहीं है।।
दिनों दिन शरीर का।।
आकार बदल रहा।।
आयु बेसुमार
बढ़ता जा रहा।।
हाथों की लकीर
सिमटता जा रहा।।
पथिक लक्ष्य के
पीछे भाग रहा।।
पर मंजिल कितनी
दूर जा रहा।।
सुख गया नयन
का कपोल
होंठों की हास
हो गई दुःखद
जीवन तो सिर्फ
एक तरास है।।
प्रियतम तो पास है।।
पर दूर नहीं है।।
गिटार तान छेड़ रहा।।
पर उसका तार
मार झेल रहा।।
नींद पहरा दे रहा।।
रात गहरी निद्रा।।
ले रहा।।
सूर्य सुरक रहा।।
महासागर की गहराई
चांद अपनी लज्जा।।
बचा रहा।।
अपनी जगह
मरण सदा हो रहा।।
आत्मा भी
दुख से रो रहा।।
जनम सदा खिल
खिला रहा।।
जीवन तो सिर्फ
एक तरास है ।।
प्रियतम तो पास है।।
पर दूर नहीं है।।
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