अरसे के बाद मेरी महबूबा के दीद्दार हुए, उनसे मुलाकात हुई,
मैं ने उनसे कहा कुछ झूठी दिलासा ही दो,
अपने होंठों पर झूठी हंसी लाते हुए उन्होंने कहा, तुम्हारी याद बहुत आती है,
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