मैं ने सोचा था बातें नहीं करूंगा तुम से, तो तुम तड़प उठोगी मेरे लिए,
जब मैं ने खामोश होकर देखा, तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,
मुझे अब पता चला अपने कभी अपने नहीं हुआ करते,
जिसको निःस्वार्थ मैं ने भरोसे के खून सींचा,वो ही दोषी बताकर चला गया,
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