तेरी नशीली आंखों में अजीब सा एक नूर का झंकार है,
तुम्हारी सूरत मुझे गुलाब सा खिलता हुआ गुलनार लगता है,
तेरे हुस्न की तारीफ में आखिर क्या बयान करूं मैं,
तेरी सूरत एक सूरत नहीं है बल्कि खुदा का तौहफा है,
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