होंठों ने तेरा ज़िक्र करना छोड़ दिया है, पर मेरी आंखें तुम्हें पैगाम देती है,
मैं तुम्हें दुनिया से छुपाऊ कैसे, क्यों कि मेरी शायरी क्तेरा ही नाम लेती है,
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