तुम को मेरी हकीकत कुछ भी पता नहीं है,
इल्ज़ाम तेरे हजारों है मुझ पर, पर मेरी खता कुछ भी नहीं है,
तुम्हारे लिए मेरे दिल में क्या है, तुम पढ़ ना सकोगी कभी कभी तुम,
मेरे दिल की किताब में पन्ने बहुत सारे हैं, पर उन पर लिखा कुछ भी नहीं,
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