मेरी जान तुम में बसती है और तेरी जान मुझ में बसती है,
यह बात तुम जानती हो या सिर्फ मैं जानता हूं,
तुम्हें चाहता तो हूं पर जमाने का डर है मुझे,
शायद इसीलिए मैं अपने लफ़्ज़ों को किताबों के शब्दों में मिलाकर रखता हूं,
अगर तुम्हें भी डर है दुनिया का,त़ो से बेहतर होगा ख्वाबों में मिलो तुम,
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