आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जमाने में कातिल कम नहीं हैं

                
                                                         
                            हलो,ऐसे भी कातिल निगाहों से ना देखा करो मुझे सनम,
                                                                 
                            
वैसे भी जमाने में कातिल कम नहीं हैं,जो मेरी क़त्ल करने पर तुली हुई है,
कभी मैं भी अच्छा हुआ करता था,
तुम से मिलने के बाद थोडा खराब हो गया मैं,
एक बात बोलो, अगर मैं ने अपनी निगाहें से तुम्हें देख लिया तो क्या होगा,
अपने क़त्ल के लिए क्या तुम भी चुपचाप निगाहें झुका लोगी,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर