दीदार हो जाता था तुम्हारा किसी भी बहाने से,तो दिल बहल जाता था मेरा,
तुम चली गई तो दिल की हसरतें, ख्वाहिशें भी ढल गई,
मुहब्बत कि दिया जो जलने की उम्मीद थी, तेरे जाते ही वो बूझ गई,
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