कोशिश करते वो बहुत पर नहीं होता,
उनके दिए जख्म का असर नहीं होता.
वक़्तों हालात अपने बस के होते गर,
तो.. कोई भी इंसान पत्थर नहीं होता.
यही देखा है, इश्क में जीने वालो को,
दर्द के सिवा कुछ मयस्सर नहीं होता.
जाने वाले फिर लौट आए मेरे रूबरू,
आंख के आगे ऐसा मंजर नहीं होता.
सूखा पड़ा है जीस्त ए दरिया, मानसी,
मुहब्बत से दिल तर ब तर नहीं होता.
-धीरज साहू मानसी
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