कल तक जो ख़्वाब था,
आज किताब बन गया।
स्याही से निकला हर एहसास,
मेरी पहचान बन गया।
लोगों ने पहले यक़ीन नहीं किया,
फिर शब्दों ने सबको जवाब दिया।
जो अल्फ़ाज़ दिल में कैद थे,
उन्होंने ही मुझे लेखक बना दिया।
ये मंज़िल नहीं, बस शुरुआत है,
अभी कई सफ़र बाकी हैं।
पहली किताब ने उड़ना सिखाया है,
अब आसमान के पन्ने बाकी हैं।
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