दुनिया देखती है खामियाँ मेरी,
माँ, फिर तुझे क्यों मैं इतना प्यारा लगता हूँ?
मुझे भी खुद में कुछ खास नहीं दिखता,
फिर तुझे क्यों मैं सबसे न्यारा लगता हूँ?
चमक नहीं है मुझमें, अब वो बात नहीं,
फिर क्यों तुझे मैं तेरी आँखों का तारा लगता हूँ?
और तेरी दुनिया तो बस मेरे इर्द-गिर्द घूमती है,
बता ना माँ, क्यों मैं तुझे तेरा जग सारा लगता हूँ?
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