याद किया पितरों को हमने सुख दुख अपने सह कर
विदा किया अपने अतीत के सुखद स्वप्न सब कह कर.
सुखद कामना लेकर तर्पण पन्द्रह दिन तक याद किया
जीवन सत्कर्मों से सज्जित, प्रयास यही अब नित कर .
-दिनेश चौहान
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