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उनकी बातेँ भी मानों

                
                                                         
                            मत रोको उन घावों को बहते हैं बह जाने दो
                                                                 
                            
बूंद बूंद रिसने से अच्छा रक्त धार बह जाने दो.

चोर उचक्के और मवाली कुर्सी पकड़े बैठे जो
एक एक कर सारे खम्बे एक साथ ढह जाने दो.

खाली हाथ जो काम मांगते उनकी बाते भी मानों
बाँध रखा जो पैसा खुद ही उसको भी बंट जाने दो.

सुविधाये सारी जो तुमने अपने हिस्से बांट रखी हैं
संविधान के अधिकारों से सब समान हो जाने दो.

खून खराबा लाठी डंडा सब लोकतंत्र सम्मान नहीं
सत्य अहिंसा भाईचारा लौट कर सब आ जाने दो.
-दिनेश चौहान
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2 महीने पहले

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