बहत्तर घण्टे का तूफान आखिर थम गया
जिन्दगी शेष थी मलवे में जा वह जम गया
लावारिस पड़ा था बेजुबान मासूम सा बच्चा
माँ बाप का साया हमेशा के लिए छिन गया .
-दिनेश चौहान
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