राज जंगल है तो जंगल ही रहेगा
पेड़ बस्तियों के बीच का ही कटेगा.
तख्त सोने का हो या लकड़ी का हो
तय करो खुद इंसान या हैवान रहेगा.
मान लिया नुमाइंदगी तुम्हारी होगी
बात कहने का हक हमारा ही रहेगा .
परचम हाथों में तुम्हारे थमा तो दिया
रुख हवाओं का तो हमारा ही रहेगा.
इस जम्हूरियत के निगहबां भले तुम हो
सल्तनत पर अधिकार हमारा ही रहेगा.
-दिनेश चौहान
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