कुछ लोगों के उठ जाने से
चलते चलते गिर जाने से
काफिले कहाँ रुका करते हैं
लोग सभी बढ़ते रहते हैं.
लक्ष्य सभी का एक ही होता
स्वर गुंजन सब एक ही होता
पतवारों को ताकत हाथों से दे
लोग सभी बढ़ते रहते हैं.
बाधाएँ प्रति पल आतीं हैं
कांटों सी पग चुभ जातीं हैं
साहस और पराक्रम भर कर
लोग सभी बढ़ते रहते हैं.
चलते रहने वाले राही
मंज़िल सहज ही छू लेते हैं
तकदीरें खुद लिखने वाले
लोग सभी बढ़ते रहते हैं.
-दिनेश चौहान
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