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शहनाई जब बजेगी

                
                                                         
                            बदली छा गईं फिर हृदय आकाश में
                                                                 
                            
भीग जायेंगे नयन अब भरी बरसात में
शहनाई जब भी बजेगी मावस की रात
याद आओगे बहुत तुम हरेक बारात में.
-दिनेश चौहान
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3 घंटे पहले

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