कौन कहाँ कब किससे मिल जायेगा
सफ़र अधूरा सब का ही रह जायेगा
अनजानी राहों का बन एक मुसाफिर
बस तलाश मंजिल की चलता जायेगा.
-दिनेश चौहान
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