बीत गये त्योहार खुशी के दिन बीते
अब लगते सुबह शाम और दिन रीते.
छोड़ बहुत सी बीती बातों को पीछे
खुशियो के कुछ पल हँसकर जीते.
-दिनेश चौहान
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