नम आँखों से लौट गये सब घर अपने पहुंच गये
जंतर-मंतर के सपनो को साकार किये लौट गये.
बिखरेगे देश के हर कोने जज़्बातों को फिर बोयेंगे
यादें जीवन भर के खातिर गठरी भर ले लौट गये.
-दिनेश चौहान
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