मर गया रावण
जल गया दस सिरों के साथ
चलो लौट चलें घरों की ओर
जहाँ इंतजार कर रही होगी
एक सीता ......
सब्जियों का
मिठाई के डिब्बों के साथ
लव कुश .......
दरवाजे पर खड़े होंगे
पटाखों के लिए
और हम फिर लगा देंगे
अपना सारा पराक्रम
इस गृहस्थी को
मँहगाई से जिताने के लिए.
-दिनेश चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X