लड़ाई मुद्दों की थी व्यक्तिगत हो गई
अहिंसा से चली फिर हिंसक हो गई
लोग दोनों तरफ अपने ही दिखे हमको
रास्ते जो चुने छोड़ कर उन्हें भटक गई.
-दिनेश चौहान
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