अब कभी हाथों से अपने छोड़कर मत दूर करना
उंगलियों संग, कर इशारे मत मुझे मजबूर करना
पत्थरों के ढेर से चुनकर के खूबसूरत कंकड़ कोई
झील के शांत जल में लहरों को ना अब दूर करना.
-दिनेश चौहान
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