लोग कुछ रिश्ते तलाशते रह गये इस भीड़ में
आने जाने वाले भी कभी कम नहीं हुए नीड़ में
कर्ज फर्ज का निभाने में हर बार टूटता रहा वो
बोझ ढोते ढोते झुक गई कमर दर्द बढ़ा रीढ़ में.
-दिनेश चौहान
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