इंतजार में सारी जिन्दगी जो गुजार देते थे
अब वही इश्क में कुछ नहीं उधार देते हैं
बैठ कर बबूल के साये में बात करते हैं वे
और दूसरों की राह में कांटे बिखेर देते हैं.
-दिनेश चौहान
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