कभी तो मुड़कर एक बार देखा होता
उदास चेहरे को थोड़ा पढ़ लिया होता
कितनी बार टूटा है दिल ये शीशे सा
कभी एक बार टुकड़ा उठा लिया होता.
-दिनेश चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X