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झलक तेरे रूप की

                
                                                         
                            उस धुँधलके में तेरी आवाज आई
                                                                 
                            
सुर तुम्हारे गीत संग इक साज लाई
हम तड़पते रह गये चातक की तरह
झलक तेरे रूप की ना एकबार पाई.
-दिनेश चौहान
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14 घंटे पहले

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