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जब भी प्यार में होते बच्चे

                
                                                         
                            कुछ वादे झूठे और सच्चे
                                                                 
                            
प्रेम में भीगे कुछ कुछ कच्चे
प्रथम मिलन का उत्सव बनते
जब भी प्यार में होते हम बच्चे.

मुँह चुप रहता आंखें कहतीं
अन्दर प्रेम की दरिया बहती
होठों ने कुछ कहने की सोची
जीभ फिसल कर दूजा कहती.

छोटी छोटी सारी बातों में
नेह भरी काली रातों में
चाह मिलन की जब भी होती
उलझन सी होती यादों में.

दिन बचपन के और यौवन के
स्वर्ण स्मरण होते जीवन के
हर एक घटना मील का पत्थर
सफ़र अधूरे हर जीवन के.
-दिनेश चौहान
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4 घंटे पहले

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