इंसान जो इंसानियत भूलकर हैवान बन गये
दिखावों में डूबकर खुद ही भगवान बन गये
दिलों में छलावे की चादर ओढ़ रोज चलते
हकीकत में पर्दे के पीछे वही शैतान बन गये.
-दिनेश चौहान
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