मंडियों में सज गये सामान बनकर
कुछ मुखौटे लग गये चेहरे के ऊपर
घंटियां हाथों में लेकर सब चले पर
बिल्लियों के गले सब खाली रहे पर.
-दिनेश चौहान
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