बरसात के पानी की तरह एक पीढ़ी निकल गई बेकार
बेवकूफी जीत गई फिर से देश गया अपनी जवानी हार.
जाति पाती प्रपंचों से सम्प्रदाय के नारों से हट जाओ अब
हम जब तक नींद से नहीं जागेंगे होगा देश में ये हर बार.
-दिनेश चौहान
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