खेल खेल में कुर्सी बदली चले गए प्रधान
लौट के बुद्धू घर आये, लगा रहे अब धान.
पिज्जा बर्गर खूब उड़ाये अनपढ़ भाई जान
खूब कबड्डी खेले दिल्ली बता रहे अब ज्ञान .
-दिनेश चौहान
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