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बुलबुले की तरह

                
                                                         
                            एक बुलबुले की तरह है
                                                                 
                            
जीवन
फ़ूट सकता है जो कभी भी
आदमी फिर भी कितना
नासमझ है
चलता है बादशाहत से .
-दिनेश चौहान
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4 घंटे पहले

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