आचरण के मानकों को तोड़कर लोग फूहड़ हो चुके हैं
जो बहुत पढ़कर ऊपर उठे विरत संस्कृति से हो चुके हैं
लोग कुछ भी कभी बोल सकते हैं यहाँ किसी को भी
स्तरों को भूलकर अपने, बड़बोले सभी अब हो चुके हैं .
-दिनेश चौहान
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