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देश भक्ति

                
                                                         
                            साहिबे मसनद हैं
                                                                 
                            
माफी मांगने वाले।
वतन के सीने में शमशीर हैं
जाम-ए-शहादत पीने वाले।
उल्फत-ए-वतन ना सिखाएं डर जाने वाले।
जज्बा-ए-अशफ़ाकउल्ला आज भी है
हम मौत से नहीं डरने वाले।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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