साहिबे मसनद हैं
माफी मांगने वाले।
वतन के सीने में शमशीर हैं
जाम-ए-शहादत पीने वाले।
उल्फत-ए-वतन ना सिखाएं डर जाने वाले।
जज्बा-ए-अशफ़ाकउल्ला आज भी है
हम मौत से नहीं डरने वाले।
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