ये हकीकत है, लेकिन छुपा लोगी तुम,
सच कहूँगा तो नज़रें चुरा लोगी तुम।
तुम खफा होकर मुझसे जुदा हो गईं,
पर असंभव है मुझको भुला लोगी तुम!”
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X