कुछ रिश्ते अनकहे से होते हैं,
जिनकी डोर न जाने,
कब दिल से जुड़ जाती है।
न कोई वादा,
न कोई नाम होता है,
फिर भी उनकी मौजूदगी खास होती है।
मगर वक़्त के साथ
यही अनकहे रिश्ते बदल जाते हैं,
कभी अपनों की वजह से,
तो कभी हालातों के हाथों मजबूर हो जाते हैं।
जो कल तक दिल के बेहद करीब थे,
आज वही अजनबी-से लगने लगते हैं,
रिश्ते शायद खत्म नहीं होते,
बस उनके मायने बदल जाते हैं।
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