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तुझे भूलना आसान था

                
                                                         
                            जो न चलती भीगी-भीगी हवा,
                                                                 
                            
तुझे भूलना आसान था।
जो न छाती काली-काली घटा,
तुझे भूलना आसान था।

जो न बादलों से निकल-निकल,
अठखेलियाँ करता वो चाँद।
जो न आँचलों से फिसल -फिसल, भरता पवन कुदरत की माँग।
जो न होती नदियों में अदा,
तुझे भूलना आसान था।

जो न होते इंतज़ार में,
पर्वत खड़े-खड़े हुए I
जो न होते हिम-बयार में,
दरखत अड़े-अड़े हुए I
जो न जाती छुईमुई लजा,
तुझे भूलना आसान था I

जो न धड़कनों से निकल-निकल,
तेरी यादें आती साँसों तक I
जो न साँसों में फिर पिघल-पिघल,
तेरी यादें जाती आँखों तक I
जो न होता इश्क़ ही ख़ुदा,
तुझे भूलना आसान था।
-देवेन्द्र पंत
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3 महीने पहले

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