हर एक मोड़ पर यादों का इश्तहार नहीं होता,
ये वो नशा है जो हर रोज़ शुमार नहीं होता।
सजा लेते हैं लोग चेहरे पर हँसी की नुमाइश,
आँखों की नमी का कोई ख़रीदार नहीं होता।
भीड़ बहुत है इस डिजिटल दौर के बाज़ारों में,
पर हर हाथ मिलाने वाला ग़मख़्वार नहीं होता।
धड़कने की आदत है दिल को सो धड़केगा पर
हर धड़कन पे 'देव' तेरा इख़्तियार नहीं होता।
-देवेन्द्र पंत
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