मीठी यादें रोज़ न आना,
वर्ना तुमको मिल जाएगा,
कड़वा हो जाने का बहाना।
तुम आकर के चमकाते हो,
दिल का आँगन नूर से अपने,
पर डर है जो आन पड़े तो,
इक साए का बोझ उठाना।
राहत तो तुम दे जाते हो,
पर कुरेदना भी आता है,
भारी पड़ जाएगा दिल को,
ज़ख़्मों पर मरहम लगवाना।
मथने से मक्खन तो मिलेगा,
नीचे मट्ठा भी तो दिखेगा,
'देव' यही है सबसे बेहतर,
तन्हाई का लुत्फ़ उठाना।
-देवेन्द्र पंत
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